
भवाली। लीसा और बिरोजा की तस्करी के नए तरीके तस्कर निकाल रहे हैं। भवाली के पास 15 साल पहले नकली शव यात्रा में बड़ी मात्रा में लीसा पकड़ा गया था। अब तस्करों ने ऐसे वाहनों से तस्करी की योजना बनाई है, जिनमें जांच एजेंसियों का ध्यान न जाए। भवाली के पास हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) के टैंकर से 185 टिन बिरोजा बरामद किया गया है। टैंकर के खाली दो चैंबर में यह लीसा रखा गया था। टैंकर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जंगलात को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पेट्रोलियम टैंकर से लीसा तस्करी किया जा रहा है। इसके बाद वन महकमे ने सैनिटोरियम पास वाहन चेकिंग शुरू की गई। तभी पहाड़ से हिंदुस्तान पैट्रोलियम का टैंकर संख्या यूके 05-सीए-1458 आता दिखा। जब जांच टीम ने चैंबरों की जांच शुरू की तो ड्राइवर और पीछे की तरफ के दो चैंबर खाली मिले। लेकिन, बीच के दो चैंबरों में अवैध बिरोजा के 185 टिन भरे हुए थे, जिनको जब्त कर लिया गया। टैंकर में भरे टिन से आवाज न हो, इसके लिए बाकायदा चैंबर के अंदर बोरों की परत बनाकर लगाई गई थी। प्रभागीय वनाधिकारी डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बरामद लीसा की कीमत करीब तीन लाख है। उन्होंने बताया कि चालक देवराज सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह निवासी ग्राम सिद्धाघाट (लोहाघाट) को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ वन अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस संबंध में टैंकर स्वामी और संबंधित पैट्रोल पंप स्वामी से भी पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इतनी बड़ी मात्रा में बिरोजा जागेश्वर के पास मनीआगर और तोलीगांव से टैंकर में लोड किया गया था और जिसने इसे रखवाया उसने चालक से भुजियाघाट में रुकने को कहा था, लेकिन उससे पहले ही पकड़ा गया। अब ऐसे वाहनों की जांच भी की जाएगी, जिन पर कम ध्यान जाता है।
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क्या है बिरोजा
लीसे से बनने वाला बिरोजा बाजार में काफी महंगा बिकता है। बिरोजा सेंट बनाने के काम आता है। लीसे को खूब पकाने के बाद तारपीन के तेल और बिरोजे को अलग किया जाता है। यह कांच की तरह होता है। बाजार में लीसे की कीमत पांच हजार रुपये क्विंटल के आसपास है। जबकि बिरोजा इससे दो हजार ज्यादा यानि सात हजार प्रति क्विंटल बिकता है।
